💞 मुझे राखी बांधोगी 💞

मीना जा, जाकर  सब्जी ले आ, सब्जीवाला आया है, माँ की आवाज़ कानो में  पड़ी और मैं जल्दी – जल्दी माँ के दिए हुए आदेश का पालन करते हुए बाहर आयी, “भैय्या टिंडे कैस दिए, आधा किलो देना, टमाटर, धनिया, आलू, मिर्च, यह सब कितने के हुए पैसे बताओ।” मैंने पैसे देने के लिए कुछ नहीं तो तीन – चार बार कहा लेकिन सब्जीवाला था कि टस-से-मस  नहीं हुआ। दिखने में तो वह शरीफ ही लग रहा था। “जी बोलिये” जी कहिए “कहकर ही बात कर रहा था, लेकिन उसकी नजर एक टक मुझे देख रही थी, जैसे देखते हुए कुछ सोच रहा हो। जब मैंने जोर से चिल्लाकर कहा ” भैया पैसे………. ” तब जैसे वो नींद से जागा हो। ” जी-जी-जी साठ रूपये हुए हैं “।” अजीब हो”  कहकर उसको साठ रूपये दिए और सब्जी लेकर अंदर आ गई। उस दिन से चाहे सर्दी, गर्मी या बरसात हो, वह हमारे दरवाजे पर आकर  ” सब्जी ले लो ” कहना नहीं भूलता था। जब भी मैं सब्जी लेकर मुड़ती वह उसी तरह की नज़रों से मुझे देखता। एक पल मुझे ऐसा लगा वह बदतमीज है, मेरे मन में उसके प्रति घृणा के भाव जाग गए “व साथ ही साथ उसको सबक भी सिखाना है मैंने ऐसा सोच लिया। अगले दिन रक्षा बंधन का त्योहार था। घर में चहल-पहल का माहौल था, मन आज बहुत खुश था। नए कपड़े, मिठाई, भैया से मिलने वाला तोहफा, यह सब सोचकर मन बहुत खुश हो रहा था कि अचानक “सब्जी ले लो सब्जी” की आवाज़ आई और आकर मेरे घर के सामने रुक गई। माँ ने हमेशा कि तरह “मीना जाना बेटी धनिया – मिर्च ले ले” कहा। एक पल तो मेरा मन बिल्कुल नहीं हुआ लेकिन मैंने दृढ़ निश्चय जो किया था कि उसको सबक सिखाना है, तो मैं बाहर जाकर उसके सामने गुस्से में खड़ी हो गई। मैंने मन ही मन सोचकर रखा था कि जैसे ही वो घूरेगा मैं आज जड़ दूंगी। मैंने धनिया – मिर्च लिया, लेकिन ये क्या रोज की तरह आज वो थोड़ा विचलित, अस्थिर सा नजर आ रहा था। आज उसने पैसे भी नहीं लिये, उसके हाथ कांप रहे थे। मैंने सोचा “मुझे क्या? मत लो पैसे!” और मैं जैसे ही जाने के लिए मुड़ी उसने कंप-कपाते हाथों को आगे किया और कहा “दीदी आज रक्षा बंधन है, क्या तुम मुझे राखी बांधोगी?” मैं दंग रह गई, दीदी…….. राखी………। फिर उसने बताया “मेरा नाम अमर है। मेरी एक बड़ी बहन थी जो बिल्कुल आपकी तरह दिखती थी, जो अब इस दुनिया में नहीं है, जब आपको पहली बार देखा तो मुझे ऐसा लगा कि मुझे मेरी दीदी फिर से मिल गई है। क्या आज आप मुझे राखी बांधोगी??” मैं यह सुनकर ना नहीं कर सकीं। अनजाने ही सही मुझे इस पावन त्योहार पर एक भाई और मिल गया, फिर उस दिन के बाद अमर दिखा नहीं लेकिन हर साल रक्षा बंधन पर राखी बंधावाने के लिए हाजिर हो जाता है। 🙏🙏

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