❣️ऐ जिन्दगी खुश हो जा।। ❣️

ऐ जिन्दगी खुश हो जा, मैंने जीना सीख लिया, क्योंकि मैंने रोते – रोते हँसकर जीना सीख लिया।

जिन्दगी तू दे चाहे जितने भी जख्म मुझे परवाह नहीं, क्योंकि मैंने उन जख्मों पर मरहम रखना सीख लिया। ऐ जिन्दगी खुश हो जा, मैंने जीना सीख लिया।।

जिन्दगी तूने मजबूर किया मुझे अंगारों पर चलने के लिए, मुझे परवाह नहीं क्योंकि उन अंगारों से मिलने वाले छालों को छलना मैंने सीख लिया। ऐ जिन्दगी खुश हो जा, मैंने जीना सीख लिया।।

जिन्दगी तूने मुझे राह दी काँटों भरी, लेकिन मुझे परवाह नहीं, क्योंकि उन काँटों को कष्ट देना मैंने सीख लिया। ऐ जिन्दगी खुश हो जा, मैंने जीना सीख लिया।।

मौत भी आ जाए ग़र मुझे परवाह नहीं, क्योंकि मैंने मर – मर कर जीना सीख लिया। ऐ जिन्दगी खुश हो जा, मैंने जीना सीख लिया। मैंने जीना सीख लिया।।

Leave a comment