कैद में हैं बुलबुल, आज उसको उड़ने दो नीले आसमान की ऊंचाईयों को उसे छूने दो माना पंख हो गए कमजोर, आज उड़ना भूल गए हैं लेकिन आत्मविश्वास के पंख लेकर आज उसको उड़ने दो कैद में हैं बुलबुल, आज उसको उड़ने दो पिंजरे से बाहर निकल, वह थोड़ा सकुचाएगी, घबराएगी, डर जाएगी निडरता का पाठ पढ़ाकर आज उसे उड़ जाने दो कैद में हैं बुलबुल, आज उसको उड़ जाने दो आसमान की गहराईयों में जब वो खो जाएगी तो शायद वो अपना वजूद पा जाएगी अपना वजूद पाने का हक आज उसे मिल जाने दो कैद में हैं बुलबुल, आज उसको उड़ जाने दो।।
✍️ कैद में हैं बुलबुल ✍️
Published by Vandana Vaidehi
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